अध्याय-1

राज्य निर्वाचन आयोग : गठन, दायित्व, एवं कर्तव्य

राज्य निर्वाचन आयोग का गठन संविधान के 73वें (संशोधन अधिनियम) के अन्तर्गत राज्य सरकार के अधिसूचना द्वारा दिनांक 30.03.1994 को हुआ। राज्य निर्वाचन आयोग का गठन पंचायती राज संस्थाओं/ग्राम कचहरी तथा शहरी क्षेत्र के स्थानीय निकायों का निर्वाचन कराये जाने के उद्देश्य से किया गया है।

संविधान के अनुच्छेद 243-K (1) में राज्य निर्वाचन आयोग की शक्तियों एवं उसके दायित्वों का उल्लेख किया गया है।

243-K Election of the Panchayats- (1) The superintendence direction and control of the preparation of electoral rolls for, and the conduct of, all elections to the Panchayats shall be vested in a State Election Commission consisting of a State Election Commissioner to be appointed by the Governor.

संविधान के अनुच्छेद 243-K(1) में राज्य की नगरपालिकाओं के निर्वाचन का प्रावधान विहित किया गया है, जो निम्नवत हैः-

Article 243-K The superintendence, direction and control of the preparation of electoral rolls for, and the conduct of, all elections to the Municipalities shall be vested in the State Election Commission referred to in Article 243-K.

उद्देश्य-

किसी भी राष्ट्र में लोकतांत्रिक व्यवस्था की परिपक्वता का मूल आधार सशक्त स्थानीय स्वायत्त शासन रही है। सशक्त एवं परिपक्व लोकतांत्रिक राष्ट्र एवं राज्यों में शक्तियों का समुचित विकेन्द्रीकरण स्थानीय स्वायत्त शासन में निहित रहती है एवं विकास का प्रवाह जमीनी स्तर से उपर की ओर होती है। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से भारतीय संविधान के 72वें एवं 73वें संशोधन कर क्रमशः शहरी निकाय एंव पंचायती राज व्यवस्था को सशक्त करने का निर्णय लिया गया ताकि स्थानीय शासन में लोगों की सक्रिय भागीदारी एवं सहभागिता सुनिश्चित हो।
स्थानीय निर्वाचनों के प्रति निर्वाचकों की अत्यधिक जागरूकता राज्य निर्वाचन आयोग को निर्वाचन स्वच्छ, निष्पक्ष, पारदर्शी, शांतिपूर्ण, उत्तरदायित्वपूर्ण एवं सहभागी बनाने हेतु प्रेरित करती है। निर्वाचन हिंसामुक्त हो, बोगस मतदान नहीं हो, मतदान केन्द्र पर कब्जा न हो, धन-बल एवं बाहुबल का प्रभाव न हो, सभी अभ्यर्थी एवं मतदाता निर्भिक होकर निर्वाचन में भागीदार हो सके, इन सभी सम्मिलित उद्देश्यों के साथ सभी मतदाताओं एवं अभ्यर्थियों को एक समान अवसर (Level playing field) प्रदान करने हेतु राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा स्थानीय निर्वाचन की रूपरेखा तैयार की गई।

चुनौतियाँ-

आयोग द्वारा स्थानीय निर्वाचन में अपने निर्धारित उद्देश्यों को प्राप्त करना आसान नहीं था, निर्वाचन प्रक्रिया में धनबल एवं बाहुबल का प्रभाव, समाज के कमजोर वर्ग की निर्वाचन प्रक्रिया में नगण्य भागीदारी, मतदान केन्द्र पर कब्जा, Silent Booth Rigging मतगणना प्रक्रिया में हेर-फेर जैसी तमाम चुनौतियां आयोग के समक्ष उपस्थित थी, जिनका समाधान किए बिना स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी, शांतिपूर्ण, उत्तरदायित्वपूर्ण एवं सहभागिता के साथ सभी मतदाताओं एवं अभ्यर्थियों को एक समान अवसर (Level playing field) प्रदान कर निर्वाचन सम्पन्न कराना असंभव था।

कार्य योजना-

स्थानीय निर्वाचनों में लोगों का विश्वास बनाए रखने एवं उद्देश्य के अनुरूप निर्वाचन को स्वतंत्र, पारदर्शी, उत्तरदायित्वपूर्ण एवं जनसहभागी बनाने हेतु आयोग स्तर पर विस्तृत कार्य योजना तैयार की गई जिसमें निर्वाचन के प्रारम्भिक चरण जैसे वार्ड गठन, मतदाता सूची का निमार्ण, मतदान केन्द्र की स्थापना से लेकर निर्वाचन परिणाम तक के प्रत्येक चरण में चुनौतियों का समाधान तकनीकी नवप्रवर्त्तनों का अनुप्रयोग कर स्थानीय निर्वाचनों के इतिहास में एक मील का पत्थर स्थापित किया गया।

पंचायत निर्वाचन

पंचायती राज व्यवस्था के अधीन बिहार में सर्वप्रथम बिहार पंचायत राज अधिनियम, 1993 लागू हुआ एवं वर्ष 2006 से संशोधनोपरान्त बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 वर्तमान में प्रवृत्त है।

बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 123 में राज्य की पंचायत निकायों के निर्वाचन के संचालन तथा निर्वाचन नामावली तैयार करने के लिए अधीक्षण, निदेशन एवं नियंत्रण हेतु राज्य निर्वाचन आयोग के गठन का प्रावधान है। उक्त अधिनियम की धारा 123 में ही राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति, सेवाशर्त तथा पदावधि का उल्लेख है। राज्य निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है।

ग्राम पंचायत/ ग्राम कचहरी के पदों यथा- जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, ग्राम पंचायत मुखिया, ग्राम पंचायत सदस्य/ ग्राम कचहरी सरपंच, ग्राम कचहरी पंच एवं जिला परिषद अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष, पंचायत समिति प्रमुख/उप प्रमुख, उप मुखिया तथा उप सरपंच का निर्वाचन बिहार पंचायत अधिनियम, 2006 (यथा संशोधित) एवं बिहार पंचायत निर्वाचन नियमावली, 2006 (यथा संशोधित) में निहित प्रावधानों के अन्तर्गत राज्य निर्वाचन आयोग के नियन्त्रण, निदेशन एवं पर्यवेक्षण में सम्पन्न कराये जाते हैं।

पंचायत आम निर्वाचन, 2021 एक नजर में

मतदान केन्द्रों की संख्या-1,13,891

मतदाताओं की संख्या- कुल 6,28,85,394 पुरूष-3,30,52,382 महिला-2,98,30,725 अन्य-2,287

प्रत्यक्ष निर्वाचन-

पद का नाम कुल पदो के आरक्षण की स्थिति
    अ.जा. अ.ज.जा. पिछड़ा वर्ग महिला
1. जिला परिषद सदस्य 1160 195 13 216 549
2. पंचात समिति सदस्य 11094 1865 130 1969 5138
3. ग्राम पंचायत मुखिया 8067 1338 90 1374 3583
4. ग्राम पंचायत सदस्य 109695 18247 1182 17705 49050
5. ग्राम कचहरी सरपंच 8067 1342 90 1370 3587
6. ग्राम कचहरी पंच 109635 18219 1200 17685 49057
कुल 247658 41206 2705 40319 110964

अप्रत्यक्ष निर्वाचन

1 जिला परिषद अध्यक्ष 38
2 जिला परिषद उपाध्यक्ष 38
3 पंचायत समिति प्रमुख 533
4 पंचायत समिति उप प्रमुख 533
5 ग्राम पंचायत उप मुखिया 8067
6 ग्राम कचहरी उप सरपंच 8067

नगरपालिका निर्वाचन-

नगरपालिकाओं, यथा- नगर निगम (2 लाख की जनसंख्या से ऊपर), नगर परिषद (40,000 की जनसंख्या से ऊपर) एवं नगर पंचायत (12000 की जनसंख्या के ऊपर) के वार्ड पार्षदों का मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष निर्वाचन तथा उनके मुख्य पार्षद/उप मुख्य पार्षद का निर्वाचित वार्ड पार्षदों द्वारा अप्रत्यक्ष निर्वाचन बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 (यथा संशोधित) एवं बिहार नगरपालिका निर्वाचन नियमावली,2007 में निहित प्रावधानों के आलोक में राज्य निर्वाचन आयोग के नियन्त्रण, निदेशन एवं पर्यवेक्षण में वर्ष 2022 के पूर्व सम्पन्न कराये गये हैं। परन्तु राज्य सरकार की अधिसूचना संख्या 176 दिनांक 02.04.2022 द्वारा नगरपालिका के पार्षद पद के साथ-साथ उप मुख्य पार्षद एवं मुख्य पार्षद पद का निर्वाचन भी मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष निर्वाचन के माध्यम से कराये जाने का निर्णय लिया गया है एवं इस संबंध में बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 तथा बिहार नगरपालिका निर्वाचन नियमावली, 2007 यथानुरूप आवश्यक संशोधन भी किया गया है।

कुल नगरपालिकाओं की स्थिति

नगर निकाय का नाम संख्या
नगर निगम 19
नगर परिषद 88
नगर पंचायत 154*
कुल 261

’6 नगर पंचायत का कार्यकाल पूरा नहीं होने के कारण 148 नगर पंचायत यानि 255 नगरपालिका का निर्वाचन 2022-23 में सम्पन्न हुए।

नगरपसलिका आम निर्वाचन, 2022-23 एक नजर में

मतदान केन्द्रों की संख्या-15,529

मतदाताओं की संख्या- कुल 1,25,65,290 पुरूष-66,01,000 महिला-59,63,827 अन्य-463

Sl.No. नगर निकाय पद का नाम अनारक्षित (अन्य) पिछड़ा वर्ग (अन्य) अनुसूचित जाति (अन्य) अनुसूचित जन-जाति (अन्य) (महिला) कुल
1 नगर निगम मुख्य पार्षद 14 3 2 0 9 19
नगर पंचायत 99 29 24 2 76 154
नगर परिषद 60 17 11 0 43 88
कुल 173 49 37 2 128 261
2 नगर निगम उप मुख्य पार्षद 14 3 2 0 9 19
नगर पंचायत 99 30 23 2 75 154
नगर परिषद 60 17 11 0 43 88
कुल 173 50 36 2 127 261
3 नगर निगम वार्ड पार्षद 643 180 95 4 442 922
नगर पंचायत 1477 387 331 16 998 2211
नगर परिषद 1729 480 330 11 1185 2550
कुल 3849 1047 756 31 2625 5683

कार्यरत बल के आधार पर आयोग एक छोटी-सी संस्था है जिसमें पदाधिकारियों तथा कर्मियों की संख्या काफी कम है। इसके बावजूद आयोग द्वारा पंचायत आम निर्वाचन तथा नगर निकायों का चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण तरीके से सफलतापूर्वक सम्पन्न कराया जाता है। आयोग में कार्यरत पदाधिकारियों तथा कर्मियों का विवरण इस प्रकार हैः-

क्र0 नाम पदनाम
1- श्री डा0 दीपक प्रसाद राज्य निर्वाचन आयुक्त
2- श्री मुकेश कुमार सिन्हा सचिव
3- श्री दिनेश कुमार उप सचिव
4- श्री राम प्रसाद शर्मा आप्त सचिव
5 श्री आशीष कुमार सिन्हा प्रशाखा पदाधिकारी
6- श्री लाल बिहारी पासवान प्रशाखा पदाधिकारी

पंचायत निर्वाचन के कार्यों की महत्ता एवं व्यापकता को ध्यान में रखते हुए उसे निर्धारित समय सीमा में पूर्ण करने के लिए आयोग के निर्देशन पर पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई।

क्र0 नाम पदनाम
1- श्री संजय कुमार विशेष कार्य पदाधिकारी
2- श्री शैलेश कुमार दास उप सचिव
3- श्री ललन प्रसाद उप सचिव
4- श्री मनोज कुमार सिंह उप निर्वाचन पदाधिकारी
5- श्री प्रेम प्रकाश अवर निर्वाचन पदाधिकारी
6- श्री अनिल कुमार पटेल अवर निर्वाचन पदाधिकारी

इसके अतिरिक्त सरकार द्वारा पर्यवेक्षकीय पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति भी की गई।

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